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October 25, 2005

केहि हिन्दी हाइकुहरु

Filed under: विविध
  • ढलती रात
    दरिया से कहती
    विदा लें हम।
  • संजय कुमार सराठे

  • जूही की कली
    महके तन मन
    हुई बावरी
  • -प्रत्यक्षा

  • याद बौराई
    रातरानी महकी
    नींद न आई।
  • –डा० गोपाल बाबू शर्मा

  • ऊँट मेमना
    दूर क्षितिज पर
    जुड़े बादल।
  • –प्रो० आदित्य प्रताप सिंह

  • नभ की पर्त
    चीर गई चिड़िया
    देखा साहस।
  • –मदन मोहन उपेन्द्र

  • सजे हुए हैं
    पलाश की दूकान
    लाल झुमके।
  • –नलिनी कान्त

  • झाँझी तू बोल
    गुम हो गए कैसे
    टेसू के बोल।
  • –सन्तोष कुमार सिंह

  • खिले कमल
    जलाशय ने खोले
    सहस्र नेत्र।
  • –रमाकान्त श्रीवास्तव

  • तोड़ देता है
    झूठ के पहाड़ को
    राई सा सच।
  • –कमलेश भट्ट कमल

  • ओढ,के सोई
    कोहरे की चादर
    जाड़े की रात।
  • डा० राजेन जयपुरिया

  • उकड़ूँ बैठी
    शर्मसार पहाड़ी
    ढूँढ़ती साड़ी।
  • –उर्मिला कौल

  • पहाड़ रोया
    अनेक धार आँसू
    झरना बहा।
  • –अशेष वाजपेई

  • यूँ ही न बहो
    पर्वत सा ठहरो
    मन की कहो।
  • –डा० जगदीश व्योम

  • बच्चा हँसा
    कायनात हँस दी
    सूरज उगा।
  • –सरला अग्रवाल

  • उगा जो चाँद
    चुपके चुरा लाई
    युवती झील।
  • –डा० शैल रस्तोगी

  • चिड़िया रानी
    चार कनी बाजरा
    दो घूँट पानी।
  • –डा० सुधा गुप्ता

  • है जवान तू
    भगीरथ भी है तू
    चल ला गंगा।
  • –पारस दासोत

  • कभी न कभी
    पुष्पित होता बाँस
    क्यों है उदास।
  • –डा० दिनेश पाठक

  • कोंपल जन्मी
    डरी डरी सहमी
    हिरोशिमा में।
  • –डा० कमल किशोर गोयनका

  • बुलाओ मुझे
    पुआल के बिछौने
    सोना चाहूँ मैं।
  • –डा० विद्याविन्दु सिंह

  • नन्हें फूलों ने
    लिखी लघुकथाएँ
    ओस बूँदों से।
  • –राम निवास पंथी

  • पतझर में
    बैठा उघारे तन
    सूना जंगल।
  • –शम्भुदयाल सिंह सुधाकर

  • मेरा ठिकाना
    खुशबुओं की गली
    ज़रूर आना।
  • –सरिता शर्मा

  • साँझ की बेला
    पंक्षी ऋचा सुनाते
    मैं हूँ अकेला।
  • –रामेशवर काम्बोज ‘हिमांशु’

  • पर्वत पर
    उगती हरी घास
    एकाकी मन।
  • –पूर्णिमा वर्मन

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