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October 29, 2005

झूठा ही सही प्यार निभाने की बात कर

  • गजल
    1. मंझधार में ना छोड के जाने की बात कर,
      झूठा ही सही प्यार निभाने की बात कर
      किसने निभाई दोस्ती किसने दगा दिया,
      तू अपनी बात कर, ना जमाने की बात कर
      माना कि बडी मुश्किलें हैं सामने तेरे,
      जैसे भी सही रब्त निभाने की बात कर
      मस्जिद की बात कर ना शिवाले की बात कर,
      एक ताजमहल ऒर बनाने की बात कर
      गीता-कुरान-बाईबिल वो आप पढेगा,
      बच्चे को अपने प्यार पढाने की बात कर
      रातों की ओर देख ना तारों की ओर देख,
      रूख्सार से बस जुल्फ़ हटाने की बात कर
      जाति के भेदभाव के मसले निकाल दे,
      ‘संजय’ दिलों में प्यार जगाने की बात कर

    -संजय विद्रोही

    2 Comments »

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    1. अपनी गजल आपके चिट्ठे पर देख कर सुखद अहसास हुआ. शुभकामनाएँ.

      Comment by sanjayvidrohi — November 23, 2005 @ 10:30 am

    2. hi sanjay

      Nice gazal keep it up
      kumar1985karki@yahoo.com

      Comment by kumar karki — March 11, 2006 @ 12:44 pm

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