बेनजीर भुट्टो
मुशर्रफ की मेहरबानी हो गई
लोकशाही बेजुबानी हो गई
आतंक की गोली चली और देखिये
बेगम भुट्टो खुद कहानी हो गई
By Rajesh Chetan
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मुशर्रफ की मेहरबानी हो गई
लोकशाही बेजुबानी हो गई
आतंक की गोली चली और देखिये
बेगम भुट्टो खुद कहानी हो गई
By Rajesh Chetan

रुपए ना मान ना सम्मान चाहिए,
हमको खु़दा ना भगवान चाहिए,
हल्दी ना तेल ना ही नून चाहिए,
हमको आतंकियों का खून चाहिए,
बार बार वार पर वार हुए हैं,
भयावाह तीज त्योहार हुए हैं,
मासूमों की चीखों से पटे हैं रास्ते,
आरती अजान हाहाकार हुए हैं,
टूटते समाज को बचाने के लिए,
दुष्टों को सबक सिखाने के लिए,
भाषणों का नहीं मजमून चाहिए,
हमको आतंकियों का खून चाहिए,
मुँह ढँक चुपचाप सोते रहे हैं,
झूठमूठ के विवाद ढोते रहे हैं,
आज भी यदि ना प्रतिकार करेंगे,
कल आप इसका शिकार बनेंगे,
शान्ति का व्रत तोड़ने के वास्ते,
भेड़ियों पे सिंह छोड़ने के वास्ते,
नई देशभक्ति का जुनून चाहिए,
हमको आतंकियों का खून चाहिए।
प्रस्तुत कविता दुइदिन अघि भएको मुर्म्बई बमकाण्डको बिषयलाई लिएर एक भारतीय ब्लगर अभिनवले उनको ब्लग ‘निनाद गाथा’ मा प्रकाशन गरेका थिए । चहल
शाम एक मन्दिर नित जाता था, आज भगवान उठ गये
मदिरालय का मुझे रास्ता पता था, आज कदम उठ गये
आज बदला सा था माहौल मदिरालय का,
हवा मे निशान था विचित्र प्रलय का,
दर्द था लावारीस, हर पग प्रणव आलय था,
आज मेला जीने वालो का था,
दिवस पीने वालो का था,
लोक आनन्द समाहित हर घूँट, नशा बाकी न था,
आज कर लिया मदिरापान साकी ने था
a poem by khoye
इश्क जब एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है।
अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो
ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है।
ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम
दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता है।
तू मुझे प्यार से देखे या न देखे ज़ालिम
तेरा अंदाज़ मोहब्बत का पता देता है।
मैं किसी ज़ाम का मोहताज नहीं हूँ ‘हसरत’
मेरा साकी मुझे आँखों से पिला देता है।
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
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